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Lord Śrī Rāma's weapon

Lord Śrī Rāma is the original divinity, the original personality of godhead, the two-armed Maha-Vishnu, and all others Vishnu-Tattvas including Shri Hari Vishnu are his expansions or amsha (parts) only. So being Amshi (the original source) of all Vishnu-tattvas, Lord Śrī Rāma didn't use the weapons of Vishnu. Lord Vishnu's prime weapon is Sudarshan disc. However, Shri Ram had also this Sudarshan Chakra, the disc of Vishnu in his Ramavatar, but he never used this, as his own weapon is the divine bow.

Shri Ram is Upmeya and Shri Hari VishNu is Upmaan, Shri Ram is the promoter of Vishnu. Shri Ram uses his own weapons which are bow and arrow. Bow represents ॐ, the curve shaped bow is incarnation of Lakshman Ji, and the straight arrow is incarnation of Hanuman Ji. Both are inseparable part of Bhagavan Shri Ram, hence a Ram-Bhakta Vaishnava should take imprints of bow and arrow on his arms .

Dhanush Baan of Shri Ram

There is another reason why Shri Rama doesn't like to use Sudarshan-disc, It is because once Shri Vishnu hurled his Sudarshan-disc on Ravana to eliminate him, but Sudarshan Chakra remained ineffective in front of Ravana and it failed after making just a bruise on Ravana's arm.

Upanishad says Bow represents the sacred syllable 'Aum' and arrow represents 'soul'.

धनुर् गृहीत्वौपनिषदं महास्त्रं शरं ह्युपासा निशितं सन्धयीत।
आयम्य तद्भावगतेन चेतसा लक्ष्यं तदेवाक्षरं सोम्य विद्धि॥३॥
(मुण्डकोपनिषद २.२.३)

Meaning: Take my friend, this bow, this great weapon of Upanisad; place veneration on it as the whetted arrow; stretch it with the thought fixed on the nature of that (brahman); that very imperishable is the target, my friend. Strike it! (Mundakopanisad 2.2.3)

प्रणवो धनु:शरोह्यात्मा ब्रह्मतल्लक्ष्यमुच्यते।
अप्रमत्तेन वेद्धव्यं शरवत्तन्मयो भवेत्॥४॥
(मुण्डकोपनिषद २.२.४)

Meaning: The Sacred syllable 'Aum' is called the bow, the arrow is the soul, and Brahman is its target; He shall be pierced by him whose attention does not swerve. Then he will become one with Him as the arrow becomes one with the target whence it has pierced it. (Mundakopanisad 2.2.4)

हिरण्मये परे कोशे विरजं ब्रह्म निष्कलम् ।
तच्छुभ्रं ज्योतिषं ज्योतिस्तद् यदात्मविदो विदुः॥९॥
(मुण्डकोपनिषद २.२.९)

Meaning: In the supreme bright sheath is Brahman (Shri Rama), free from taints and without parts. It is pure, and is the Light of lights. It is that which the knowers of the Self realize. (Mundakopanisad 2.2.9)

भगवान श्री राम का निज-आयुध है : धनुष और बाण , जैसा कि हमने पहले बताया श्री राम स्वयं सर्वावतारी पुरुष हैं, और विष्णु उनके अंश हैं अतः भगवान श्री राम कभी भी अपने अंश के आयुध सुदर्शन-चक्र का प्रयोग नहीं करते हैं, इससे यह भी विदित होता है कि श्री राम विष्णु से भी विलक्षण स्वयं परमात्मा हैं | क्यों विलक्षण ? क्योंकि सुदर्शन चक्र भी रावण का कुछ ना बिगाड़ सका था वो मात्र निशान बना के निस्तेज रह गया था|

भगवान श्री राम का निजायुध तो धनुष बाण हीं है, सुदर्शन चक्र नहीं | अब भगवान श्री राम के निज-आयुध धनुष की महत्ता तो पता चल गयी जिसे श्री राम सदैव अपने साथ रखते हैं |

करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा॥

भावार्थ:- भगवान श्री राम के हाथों में बाण और धनुष बहुत ही शोभा देते हैं। उनका ऐसा रूप देखते ही चराचर (जड़-चेतन) मोहित हो जाते हैं।

धनुष वक्र होता है और यह ओम (ॐ) का प्रतीक है, बाण आत्मा का प्रतीक है, जैसा कि मांडूक्य उपनिषद में आता है

भगवान श्री राम का धनुष लक्ष्मण जी के टेढ़े स्वभाव का प्रतीक है और बाण सीधे होने के कारण सरल-सहज स्वभाव वाले भक्त शिरोमणि हनुमान जी का प्रतीक है, इन दोनों को भगवान से कभी अलग नहीं किया जा सकता, अतः धनुष-बाण के रूप में लक्ष्मण जी और हनुमान जी सदा श्री राम के साथ रहते हैं | सभी श्री राम-भक्तों को चाहिए कि वो भगवान श्री राम के निज-आयुध धनुष-बाण के चिन्हों को अपने कंधे या बाजू पे धारण करें |

।।श्रीमद्रामचंद्रचरणौ शरणं प्रपद्ये।।
।। श्रीमते रामचन्द्राय नमः ||

।।śrīmadrāmacaṃdracaraṇau śaraṇaṃ prapadyē।।
।। śrīmatē rāmacandrāya namaḥ ||

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॥ श्रीसीतारामचंद्रार्पणमस्तु ॥